Hyperthermia हाइपरथर्मिया क्या है? हीट स्ट्रोक या अतिताप के लक्षण, कारण, इलाज और परीक्षण

Hyperthermia हाइपरथर्मिया क्या है? हीट स्ट्रोक या अतिताप के लक्षण, हाइपरथर्मिया का कारण, हाइपरथर्मिया के इलाज और परीक्षण, हाइपरथर्मिया की दवाई और उपचार  – Hyperthermia in Hindi

Contents

हाइपरथर्मिया क्या है? (What is hyperthermia?)

जब शरीर का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है और इससे व्यक्ति की सेहत को खतरा होने की संभावना रहती है, तो इस स्थिति को हाइपरथर्मिया कहा जाता है। कई स्थितियों के कारण हाइपरथर्मिया हो सकता है।

बच्चों से लेकर बड़ों और महिलाओं सभी को यह दिक्कत हो सकती है। दिमाग के हाइपोथैलेमस (शरीर का तापमान कंट्रोल करने वाला भाग) के प्रभावित होने से यह दिक्कत होती है! हाइपरथर्मिया के मामले ज्यादा दिखते हैं।

यह अक्सर वातावरण में अधिक गर्मी होने या शरीर से पर्याप्त मात्रा में गर्मी बाहर न निकल पाने की स्थिति में होता है। यदि शरीर का तापमान 104°F (40°C) से अधिक है, तो यह गंभीर हाइपरथर्मिया का संकेत है।

हाइपरथर्मिया एक खतरनाक बुखार है (Hyperthermia is a dangerous fever)

गर्मी और चिलचिलाती धूप बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी को बीमार कर रही है। इस मौसम में तेज धूप और गर्मी के कारण आने वाला फीवर हाइपरथर्मिया भी हो सकता है, जिसकी चपेट में सबसे ज्यादा बच्चे और बूढ़े आते हैं। दिन-ब-दिन बढ़ रही इस गर्मी में अपना ध्यान रखना हर किसी के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि हाइपरथर्मिया घातक भी हो सकता है।

हाइपरथर्मिया के लक्षण (Symptoms of hyperthermia)

हाइपरथर्मिया के कई चरण हैं, जिसमें सबसे गंभीर हीट स्ट्रोक है। यह घातक हो सकता है। यदि हीट से संबंधित स्थितियों का प्रभावी ढंग से व जल्दी इलाज नहीं किया गया तो हीट स्ट्रोक हो सकता है। हीट स्ट्रोक अक्सर तब होता है जब शरीर का तापमान 104°F (40°C) से ऊपर पहुंच जाता है और इस स्थिति का सबसे पहला लक्षण बेहोश होना है। इसके अन्य लक्षण निम्न हैं:

    • चिड़चिड़ापन
    • उलझन में रहना
    • तालमेल बैठाने में दिक्कत आना
    • पसीना कम आना
    • पल्स का धीमा या तेज होना

इन लक्षणों के दिखने पर क्या करें:

    • ठंडे वातावरण में रहने की कोशिश करें
    • पानी या इलेक्ट्रोलाइट से युक्त स्पोर्ट्स ड्रिंक पिएं
    • जल्दी ठीक होने के लिए ठंडे पानी से स्नान करें
    • अपनी बाहों के नीचे और कमर के आसपास बर्फ की सिकाई करें

हीट रैश (Heat Rash)

हीट रैशेज तब दिखाई देती है, जब आपकी त्वचा में आपका पसीने रोमछिद्रों में फंस जाते हैं। ये काफी छोटे होते हैं और ज्यादातर लाल-गुलाबी रंग के होते हैं। कभी-कभी ये हल्के पिंपल्स की तरह भी हो सकते हैं।

क्रिशटालीना (Crishtalina)

ये साफ पानी के बुलबुले की तरह आपकी त्वचा पर दिखते हैं और कई घंटों या दिनों तक आपके साथ रह सकते हैं। ये बिना दर्द के आपके साथ रहते हैं और समय के साथ ठीक हो जाते हैं।

हीटस्ट्रोक (Heat Stroke)

ज्यादातर लोग हीटस्ट्रोक का शिकार होते हैं, ये गर्मी की बीमारी का सबसे गंभीर रूप है। हीट स्ट्रोक में तापमान 104 डिग्री से ऊपर होता है और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की शिथिलता है। ये एक गंभीर स्थिति के बाद जानलेवा भी हो सकता है।

यदि इस सबके बावजूद हाइपरथर्मिया के लक्षणों में सुधार नहीं आ रहा है या आपके सामने किसी को हीट स्ट्रोक आ रहा है तो तुरंत मेडिकल हेल्प लें या एम्बुलेंस को कॉल करें।

हाइपरथर्मिया में किन बातों का ध्यान रखें (What to keep in mind in hyperthermia)

सूरज की तेज किरणें और इससे होने वाले पानी की कमी से शरीर का तापमान बिगड़ जाता है। यह अवस्था बुखार से अलग होती है क्योंकि इसमें तापमान बढ़कर या घटकर स्थिर हो जाता है। वहीं बुखार होने पर शरीर का तापमान घटता और बढ़ता रहता है। ऐसे में जरूरी है कि कुछ बातों का ध्यान रखा जाए। जैसे इस मौसम में डाइट में कुछ बदलाव जरूरी हैं ताकि शरीर को पर्याप्त नमी मिले और तापमान नियंत्रित रहे।

    • बुखार तेज होने पर रोगी को ठंडी हवा में आराम कराएं।
    • यदि रोगी के शरीर का तापमान 103डिग्री फेरनहाइट हो जाए तो सिर पर ठंडे पानी की पट्टी बार-बार रखें।
    • मरीज के शरीर को दिन में 3-4 बार गीले तौलिए से पौछें।
    • चाय या कॉफी आदि पीने को न दें।
    • लंबे समय तक एसी या कूलर में बैठने के बाद अचानक तेज सूरज की किरणों के संपर्क में न आएं।
    • ऐसे नवजात जो जन्म के समय कमजोर और कम वजन के साथ पैदा होते हैं उन्हें तुरंत स्पेशल केयर यूनिट में रखा जाना चाहिए।
    • लिक्विड डाइट जैसे दही, मट्ठा, जीरा वाली छाछ, जलजीरा, लस्सी, आमपना आदि पीते रहें।
    • भोजन में ठंडी तासीर वाली चीजें खाएं।
    • रोजाना एक मौसमी फल कच्चा खाएं या फिर इनका जूस भी पी सकते हैं।
    • शराब और धूम्रपान से तौबा करें।
    • बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी तरह की दवाएं न लें। ये शरीर में गर्मी बढ़ाती हैं।
    • घर से बाहर निकलते समय स्कार्फ से चेहरा ढकें और आंखों को सूरज की तेज किरणों से बचाने के लिए सनग्लास पहनें।
    • किसी भी लक्षण को लंबे समय तक नजरअंदाज न करें।
हाइपरथर्मिया क्या है, हाइपरथर्मिया का कारण, हाइपरथर्मिया का इलाज
हाइपरथर्मिया क्या है, हाइपरथर्मिया का कारण, हाइपरथर्मिया का इलाज

हाइपरथर्मिया के कारण (Causes of Hyperhermia)

सर्दियों में एक साल से छोटे बच्चे व नवजातों को उनके अभिभावक बहुत ढक कर रखते हैं। एकाएक से गर्मी का मौसम आ जाने से नवजातों का शरीर यह बदलाव झेल नहीं पाता। गर्मी में भी नवजातों को ज्यादा कपड़ों में ढक कर रखते हैं। ऐसे में हाइपरथर्मिया का खतरा रहता है। इसके अलावा वजन के अनुपात में बच्चों के त्वचा का एरिया ज्यादा होता है। ऐसे में बच्चों में हीट जल्दी से गैन हो जाती है।

    • जो लोग बहुत गर्म वातावरण में काम करते हैं उन्हें हाइपरथर्मिया होने का खतरा ज्यादा रहता है।
    • किसी भवन के निर्माण में काम करने वाले मजदूरों, किसानों और अन्य ऐसे लोग, जो गर्मी में लंबे समय तक रहते हैं, वे भी हाइपरथर्मिया का शिकार हो सकते हैं। अग्निशामकों (आग को बुझाने वाले कर्मचारी) और बड़ी चिमनियों के आसपास काम करने वाले लोगों पर भी यही बात लागू होती है।
    • बच्चों और अधिक उम्र के वयस्कों में भी इस बीमारी का जोखिम हो सकता है। कई बच्चे गर्म वातावरण में बिना आराम किए लगातार खेलते रहते हैं, इससे उनमें पानी की कमी हो जाती है और शरीर का तापमान बढ़ जाता है। यदि वृद्ध वयस्क बहुत गर्म मौसम में भी बिना पंखे या एयर कंडीशनर के घर में रहते हैं, तो वो भी हाइपरथर्मिया की चपेट में आ सकते हैं।

हाइपरथर्मिया किस वजह से होता है? (What Causes Hyperthermia?

इस मौसम में तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण इसका खतरा वैसे ही बढ़ जाता है। उस पर हम अगर तरल पदाथ का सेवन सही ढंग से नहीं करते और गर्म हवाओं से अपना बचाव नहीं करते तो इसका खतरा और भी बढ़ जाता है।

इसके अलावा हमारा रहन-सहन भी इसका कारण बनता है। अकसर सर्दियों में हम खुद को बहुत ढक कर रखते हैं। फिर जब एकाएक गर्मी का मौसम आता है तो शरीर यह बदलाव झेल नहीं पाता। कई बार लोग गर्मी में भी खुद को ज्यादा कपड़ों में ढक कर रखते हैं। ऐसे में हाइपरथर्मिया का खतरा रहता है।

हाइपरथर्मिया का इलाज (Treatment of hyperthermia)

हाइपरथर्मिया को रोकने के लिए सबसे पहले गर्म जगह से दूर चले जाएं। गर्म तापमान में रहने पर निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए:

    • ठंडे वातावरण में रहें या ऐसी जगह जाकर आराम करें, जहां गर्मी न हो। अगर तेज गर्मी में बाहर जाने की जरूरत नहीं है तो घर पर ही रहें।
    • पानी पीते रहें ताकि शरीर हाइड्रेट रहे।
    • घर से बाहर निकलने पर हल्के रंग के कपड़े पहनें।
    • अगर घर में ए.सी नहीं है या घर गर्म रहता है, तो कुछ देर के लिए मॉल, लाइब्रेरी या किसी अन्य ठंडी जगह पर जाकर आराम करें।

हाइपरथर्मिया से बच्चों को कैसे बचाएं (How to protect children from hyperthermia)

बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान

    • जितना ज्यादा हो सके नवजातों को मां का दूध ही पिलाएं, इससे उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी।
    • नवजातों के शरीर को ज्यादा ढक के न रखें। सूती कपड़े ही पहनाएं।
    • नवजातों को ठंडे कमरे में रखें।
    • शरीर के ज्यादा गर्म होने पर शरीर पर समय-समय पर गीले कपड़ा फेरते रहें।
    • दो साल से अधिक उम्र के बच्चों को पानी के अलावा मिनरल्स भी दें।
    • कमरे के तापमान को 30 डिग्री तक रखने का प्रयास करें।
हाइपरथर्मिया-hyperthermia
हाइपरथर्मिया-hyperthermia

शराब पीने वालों पर हाइपरथर्मिया का असर (Effect of hyperthermia on drinkers)

जो लोग शराब पीने के आदी हैं उनमें हाइपरथर्मिया घातक हो सकता है। इसका कारण उनके शरीर की गर्मी का त्वचा के जरिए पसीने के रूप में न निकलना है। हीट स्ट्रोक की स्थिति बने तो तुरंत डॉक्टरी सलाह जरूर लें। अचानक ठंडे से गर्म या गर्म से ठंडे वातावरण में न जाएं।

बच्चों को हाइपरथर्मिया का खतरा (Children at risk of hyperthermia)

बच्चों को हाइपरथर्मिया का खतरा ज्यादा हो सकता है, बच्चों का शरीर गर्म होने पर सामान्य बुखार की जगह हाइपरथर्मिया (हीट स्ट्रोक) हो सकता है। यदि बच्चों का शरीर गर्म है तो जरूरी नहीं कि सामान्य बुखार ही हो। यह हीट स्ट्रोक यानी हाइपरथर्मिया हो सकता है।

गर्मी के दिनों में 30 फीसदी केस हीट स्ट्रोक के आते हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि यह शुरुआत है। दिन-ब-दिन बढ़ रही गर्मी में बच्चों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, नहीं तो एक साल से छोटे बच्चों के लिए यह घातक हो सकता है।

हाइपोथैलेमस कैसे काम करता है? (How does the hypothalamus work?)

तापमान के बढ़ने के साथ एक शरीर का तापमान भी बढ़ने लगता है। दिमाग की एक ग्रंथी हाइपो थैलेमस शरीर के हीट रेग्युलेटरी सिस्टम की तरह काम करता है। यह शरीर के टेंपरेचर को संतुलित रखने का काम करता है।

तेज गर्मी के कारण कई बार ग्रंथी में कमजोरी आ जाती है और यह काम करना बंद कर देता है। ऐसे में तापमान का संतुलन बिगड़ जाता है। शरीर की अत्यधिक हीट बाहर नहीं निकल पाती। इससे शरीर गर्म होने लगता है। शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन से भी ऐसा होता है।

क्या हाइपरथर्मिया सामान्य बुखार है? (Is hyperthermia a common fever?)

बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि हाइपरथर्मिया सामान्य बुखार से अलग है। सामान्य बुखार में शरीर का तापमान 38 से 41 डिग्री सेंटीग्रेड रहता है, जबकि हाइपरथर्मिया में शरीर का तापमान 42 से अधिक भी हो जाता है। हाइपरथर्मिया सामान्य बुखार से अलग है। सामान्य बुखार में शरीर का तापमान 100 से 105 डिग्री फारेनहाइट रहता है, जबकि हाइपरथर्मिया में शरीर का तापमान उससे अधिक भी हो जाता है। हाइपो व हाइपरथर्मिया दोनों ही अलग अवस्थाएं हैं।

हाइपरथर्मिया बुखार कब होता है? (What Causes Hyperthermia?)

बुखार तब होता है जब आपके मस्तिष्क का एकहिस्सा, जिसे हाइपोथैलेमस (hypothalamus; जिसे आपके शरीर की “थर्मोस्टेट” भी कहा जाता है) कहा जाता है, आपके शरीर के सामान्य तापमान के निर्धारित बिंदु को ऊपर ले जाता है।

जब ऐसा होता है, तब आपको ठंड महसूस हो सकती है और आप ज़्यादा कपडे पहन लेते हैं या कंबल में लिपट जाते हैं या आपको कंपकपी भी हो सकती है, जिससे शरीर में ज़्यादा गर्मी उत्पन्न होती है। इसके परिणामस्वरूप शरीर का तापमान बढ़ जाता है।

शरीर का सामान्य तापमान पूरे दिन बदलता रहता है, जैसे सुबह के समय शरीर का तापमान कम होगा और देर दोपहर या शाम को तापमान बढ़ जाता है। हालांकि ज्यादातर लोग 98.6 F (37 डिग्री C) के तापमान को सामान्य मानते हैं। आपके शरीर का तापमान डिग्री के अनुसार 97 F (36.1 C) से 99 F (37.2 C) ऊपर नीचे हो सकता है, जिसे सामान्य माना जाता है।

हाइपरथर्मिया और हाइपोथर्मिया के बीच अंतर (Difference between hyperthermia and hypothermia)

हाइपो व हाइपरथर्मिया दोनों ही अलग अवस्थाएं हैं। हाइपरथर्मिया में जहां शरीर का तापमान बढ़ जाता है, वहीं हाइपाे थर्मिया में शरीर का तापमान घट जाता है। हाइपो थर्मिया में शरीर की हीट बहुत ज्यादा मात्रा में शरीर से बाहर निकल जाती है। ऐसे में नवजातों के शरीर ठंडे पड़ जाते हैं। ऐसा अत्यधिक सर्दी के दिनों में हो सकता है।

हाइपर = ऊपर / अधिक / से अधिक। हाइपो = कम / से कम। यह इन शब्दों का मोटा अनुवाद है।

थर्मिया शरीर का तापमान है। मनुष्य का सामान्य तापमान लगभग 98.6 डिग्री है। इस दहलीज के ऊपर के तापमान को हाइपरथर्मिया और सामान्य शब्दों में “फीवर” कहा जाता है। यह एक घटना है जिसे हम सभी ने अनुभव किया होगा।

हाइपोथर्मिया अत्यधिक ठंडे कपड़े, बर्फ आदि के संपर्क के कारण होता है, बिना उचित कपड़े या आवरण के। शरीर का तापमान कम हो जाता है और सभी प्रणालियां एक-एक करके बंद हो जाएंगी, जिससे मृत्यु हो जाएगी। यह भी, एक गंभीर स्थिति है और अगर इलाज / उलटा नहीं किया जाता है, तो मृत्यु दर का पालन किया जाता है।

    • दोनों ही स्थितियाँ शरीर के अतिरेक के कारण हैं।
    • हाइपोथर्मिया मुख्य शरीर के तापमान में गिरावट है जबकि हाइपरथर्मिया एक वृद्धि है।
    • हाइपोथर्मिया गर्मी संरक्षण तंत्र को ट्रिगर करता है जबकि हाइपरथर्मिया गर्मी के नुकसान को ट्रिगर करता है।
    • पुनर्मुद्रण हाइपोथर्मिया का इलाज करता है जबकि शीतलन अतिताप का इलाज करता है।

हाइपरथर्मिया जानलेवा है? (Is hyperthermia fatal?)

अगर तुरंत इलाज न हो तो हाइपर थॢमया जानलेवा भी हो सकता है। ज्यादा गर्मी से शरीर में थकावट महसूस होना और हाइपर थॢमया दोनों में अंतर है। हाइपरथर्मिया हीट स्ट्रोक और लू लगने से ज्यादा गंभीर स्थिति है।

तेज धूप या तेज तापमान में काफी देर तक सनलाइट के संपर्क में रहने से शरीर का तापक्रम 98.6 डिग्री फारेनहाइट से कहीं अधिक हो जाता है। अगर शरीर का तापक्रम 104 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा हो जाए तो चिंताजनक स्थिति होती है

हाइपरथर्मिया से इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन (Electrolyte imbalance from hyperthermia)

तेज धूप से लोगों में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन की शिकायत होती है, जो शुगर, बीपी और न्यूरो की दवाएं खाने वाले मरीजों के लिए ज्यादा खतरनाक है। तेज धूप और गर्मी से शरीर में सोडियम और पोटैशियम का संतुलन बिगड़ जाता है।

इसी के चलते लोगों में हाइपर थर्मिया की बीमारी हो जाती है। इसमें तेज बुखार के बाद शरीर तपने लगता है। इस बीमारी का एक कारण शरीर में पानी की कमी भी होता है।

हाइपरथर्मिया अटैक (Hyperthermia attack)

जब तेज सिरदर्द, सांस तेजी से लेना, दिल की धडक़न तेज होना, त्वचा लाल हो जाना, चक्कर आना, उल्टी आना, काफी पसीना आना जैसे लक्षण दिखने लगें तो समझ जाएं कि यह हाइपर थर्मिया अटैक है। इसके बाद मरीज को तुरंत मेडिकल केयर में रखना चाहिए।

हीट स्ट्रोक हाइपरथर्मिया (Heat stroke hyperthermia)

हीट स्ट्रोक हाइपरथर्मिया का गंभीर रूप है शरीर में बहुत ज्यादा गर्मी अवशोषित होने के कारण ऐसा होता है इसका इलाज न करना घातक साबित हो सकता है इसके कुछ लक्षण है सांस लेने में परेशानी पल्स बढ़ना शरीर का तापमान बढ़ना भ्रमित महसूस करना आदि !

हीट स्ट्रोक हाइपरथर्मिया का एक प्रकार है; जो कि थर्मोरेगुलेशन के क्रियान्वयन में गड़बड़ी से होता है, जिसके कारण शरीर का तापमान अपेक्षाकृत बढ़ जाता है हीट स्ट्रोक का पता ताप  की सम्मिलित वृद्धि और कमी द्वारा लगाया जा सकता है| यह उच्च तापमान और अधिक शारीरिक मेहनत के कारण हो  सकता है।सही समय पर इलाज ना करने पर यह घातक हो सकता है!

हाइपरथर्मिया के प्रकार (Types of hyperthermia)

वे इस प्रकार हैं:

लाल : इसे सबसे सुरक्षित माना जाता है। परिसंचरण संबंधी विकार नहीं होते हैं। शरीर को ठंडा करने की एक प्रकार की शारीरिक प्रक्रिया, जो आंतरिक अंगों को गर्म करने से रोकती है। लक्षण – त्वचा का रंग गुलाबी या लाल रंग में बदल जाता है, छूने पर त्वचा गर्म होती है। आदमी खुद गर्म है, उसे बहुत पसीना आता है।

सफेद : हाइपरथर्मिया क्या है, यह बोलते हुए, कोई भी इस प्रजाति को अनदेखा नहीं कर सकता है। यह मानव जीवन के लिए खतरा है। संचार प्रणाली के परिधीय रक्त वाहिकाओं की एक ऐंठन होती है, जो गर्मी हस्तांतरण प्रक्रिया के विघटन की ओर जाता है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक रहती है, तो यह अनिवार्य रूप से मस्तिष्क की सूजन, बिगड़ा हुआ चेतना और दौरे की उपस्थिति का कारण होगा। आदमी ठंडा है, उसकी त्वचा एक खिली खिली खिली खिली हुई है।

तंत्रिकाजन्य : इसकी घटना का कारण मस्तिष्क की चोट, एक सौम्य या घातक ट्यूमर, स्थानीय रक्तस्राव, धमनीविस्फार है। यह प्रजाति सबसे खतरनाक है।

बहिर्जात : यह तब होता है जब परिवेश का तापमान बढ़ जाता है, जो शरीर में बड़ी मात्रा में गर्मी के प्रवेश में योगदान देता है।

अंतर्जात : घटना का एक सामान्य कारण विषाक्तता है।

हाइपरथर्मिया के लिए दवाएं (Medications for hyperthermia)

    • कैल्शियम कार्बोनेट
    • डायजेपाम
    • पोटेशियम साइट्रेट
    • क्लोनाज़ेपम
    • क्लोबजम

हाइपरथर्मिया से बचने के घरेलू उपाय (Home remedies to avoid hyperthermia)

लोगों को इस मौसम में अपना खास ख्याल रखना चाहिए। इस मौसम में सबसे फायदेमंद है पानी और दूसरे तरल पदार्थ, इसलिए इन चीजों का प्रयोग करें।

    • शरीर को ज्यादा ढक कर न रखें। सूती कपड़े ही पहनें।
    • ठंडे कमरे या ठंडे स्थान में रहें।
    • शरीर के ज्यादा गर्म होने पर शरीर पर समय-समय पर गीला कपड़ा $फेरते रहें।
    • दो साल से अधिक उम्र के बच्चों को पानी के अलावा मिनरल्स भी दें।
    • कमरे के तापमान को 30 डिग्री तक रखने का प्रयास करें।
    • ओआरएस, ग्लूकोस या नीबू पानी का सेवन करें।
    • लस्सी, पना, मट्ठा, सत्तू का शर्बत जैसे पेय पदार्थ लें।
    • धूप और तेज गर्मी से बचें।
    • परवल, लौकी, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा, मौसमी, संतरा, अंगूर, आम और अनार खाएं।
    • कड़वे, खट्टे, चटपटे, मिर्च-मसालेदार तले खाने से बचें।
    • बासी भोजन न करें।
    • सूर्योदय से पहले स्नान कर दो से तीन किमी तक टहलें।
    • तेज बुखार होने पर कोल्ड स्पंजिंग करें।

गर्मी में ज्यादा देर तक न रहें

अगर आप बाहर रहते हैं तो कोशिश करें कि ज्यादा देर तक धूप या गर्मी का सामना न करें। इससे आपके शरीर में पानी की कमी हो सकती है और आप हीट स्ट्रोक का शिकार हो सकते हैं।

ज्यादा से ज्यादा आराम करें

अगर आप कोई शारीरिक गतिविधि कर रहे हैं, तो जरूरी है कि आपको थोड़ी-थोड़ी देर में आराम करना चाहिए। इससे आपका शरीर अंदर से गर्म होने से बचता है और आपको पानी की कमी भी नहीं होती।

हाइड्रेट रहें

गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा जरूरी होता है कि हम समय-समय पर पानी पीते रहें जिससे कि हमारे शरीर में पानी की कमी न हो और हम हाइड्रेट रहने में कामयाब हो सके। पानी के अलावा आप फल और जूस का सेवन भी कर सकते हैं, इनसे भी आपको पानी की कमी पूरी होती है और आप डिहाइड्रेशन से बचे रहते हैं।

हाइपरथर्मिया का परीक्षण (Hyperthermia test)

अगर आपको कोई समस्या है तो वह डॉक्टर को दिख जाता है जबकि लैब परीक्षण डायग्नोसिस निर्धारित करते है और दिक्कत के विभिन्न कारण,लक्षण और ऑर्गन इंजरी बताते है!

निम्न परीक्षण होते है:

    • रक्त सोडियम या पोटेशियम और आपके रक्त में गैसों के पदार्थ की जांच करने के लिए एक रक्त परीक्षण यह जांचने के लिए कि क्या आपकी फोकल सेंसरी प्रणाली को नुकसान हुआ है या नहीं
    • आपके पेशाब के रंग की जांच करने के लिए एक पी परीक्षण, क्योंकि यह आमतौर पर बंद होने की संभावना पर गहरा होता है कि आपके पास गर्मी से संबंधित स्थिति है, और किडनी क्षमता की जांच करने के लिए, हीट स्ट्रोक से प्रभावित हो सकती है।
    • वास्तविक मसल टिश्यू नुकसान की जांच के लिए मसल कैपेसिटी टेस्ट|
    • एक्स-रे और अन्य छाया परीक्षण आंतरिक अंगो की जांच के लिए|

हाइपरथर्मिया एक बढ़ता हुआ खतरा (Hyperthermia is an increasing risk)

सूरज की तपिश से दिनोंदिन चढ़ रहा पारा लोगों की सेहत को प्रभावित करने लगा है। कोरोना संक्रमण के खतरे से लोग पहले ही परेशान हैं, अब तेज धूप और गर्मी से हाइपरथर्मिया का भी खतरा पैदा हो गया है। अस्पतालों की ओपीडी भी बंद है। इससे इलाज मिलना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में डॉक्टर लोगों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दे रहे हैं। साथ ही जरूरी एहतियात बरतने को कह रहे हैं।

हाइपरथर्मिया से बचने के उपाय (Measures to avoid hyperthermia)

    • हाइपरथर्मिया की स्थिति से बचने का सबसे आसान तरीका है धूप और गर्म हवा से दूर रहना। तापमान बढ़ने से हाइपरथर्मिया के बुखार में इलाज मिलने में देरी से मरीज की जान भी जा सकती है। इससे बचाव के लिए ठंडी तासीर वाले आहार लें। बासी या ज्यादा तला भुना भोजन न खाएं।
    • धूप और गर्म हवा से होता है हाइपरथर्मिया
    • तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण इसका खतरा बढ़ जाता है। बहुत देर तक धूप में या गर्म हवाओं के संपर्क में रहने से हाइपरथर्मिया हो सकता है। इसके अलावा खान-पान में की गई लापरवाही भी इसका कारण बन सकती है

गंभीर हाइपरथर्मिया का संकेत (Signs of severe hyperthermia)

जब शरीर का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है और इससे व्यक्ति की जान को खतरा होने की आशंका बढ़ जाती है तो इस स्थिति को हाइपरथर्मिया कहते हैं। कई स्थितियों में हाइपरथर्मिया हो सकता है। यह वातावरण में अधिक गर्मी होने या शरीर से पर्याप्त मात्रा में गर्मी बाहर न निकल पाने की स्थिति में होता है। यदि शरीर का तापमान 104 डिग्री फॉरेनहाइट से अधिक है तो यह गंभीर हाइपरथर्मिया का संकेत है।

हाइपरथर्मिया से बचाव के नुस्खे (Tips to prevent hyperthermia)

    • विटामिन सी या अन्य रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली चीजों का सेवन करें। सूती कपड़े पहनें। ठंडे कमरे या ठंडे स्थान पर रहें। शरीर के ज्यादा गर्म होने पर माथे पर गीली पट्टी रखें। ओआरएस, ग्लूकोज या नींबू पानी का सेवन करें। लस्सी, पन्ना, सत्तू का शर्बत जैसे पेय पदार्थ लें। धूप और तेज गर्मी से बचें। लौकी, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा, मौसमी फल जैसे संतरा, अंगूर, आम और अनार खाएं।
    • तेज बुखार होने पर सिर पर कोल्ड स्पंजिंग करें। लिक्विड डाइट जैसे दही, मट्ठा, जीरा वाली छाछ, जलजीरा, लस्सी, आमपना आदि पीते रहें। शराब और धूम्रपान से तौबा करें। बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी तरह की दवाएं न लें। ये शरीर में गर्मी बढ़ाती हैं। घर से बाहर निकलते समय स्कार्फ से चेहरा ढकें और आंखों को सूरज की तेज किरणों से बचाने के लिए सनग्लास पहनें।

हाइपरथर्मिया पर निबंध (Essay on hyperthermia)

हाइपरथर्मिया या हीट स्ट्रोक में अत्यधिक गर्मी की वजह से शरीर का तापमान सामान्य से बहुत बढ़ जाता है। अक्सर यह समस्या तेज़ धुप या गर्मी में बहुत थका देने वाले काम करने से होती है। हाइपरथर्मिया एक अवस्था है जिसमें शरीर का तापमान सामान्य स्तर जो की 98.6 F है, से बढ़ जाता है। यह ज्वर जैसा प्रतीत होता है पर मूल रूप से अलग है। जब हम बीमार होते हैं तो शरीर का ताप बढ़ता है। यह बुखार शरीर से संक्रमण को खत्म करता है और इस तरह बीमारी से लड़ने में शरीर की मदद करता है। वहीं दूसरी ओर हाइपरथर्मिया तब होता है जब शरीर में गर्मी इतनी बढ़ जाती की शरीर को ठंडक प्रदान करने वाला तंत्र भी विफल हो जाता है। जब हमारे शरीर में गर्मी बढ़ती है तो पसीने के द्वारा शरीर स्वयं को ठंडा रखता है। जब यह क्रिया भी असर नहीं कर पाती तो हाइपरथर्मिया हो जाता है। हाइपरथर्मिया का मुख्य कारण तेज़ धुप में अत्यधिक मेहनत करना है। हालाँकि कुछ मामलों में दवाई के दुष्प्रभाव होने पर या किसी खास बीमारी में भी हाइपरथर्मिया के लक्षण देखे जाते हैं। हाइपरथर्मिया की समस्या को कैंसर के उपचार में उपयोग किये जाने वाले हाइपरथर्मिया से नहीं जोड़ना चाहिए जिसमे शरीर के तापमान को बढ़ाकर संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। हाइपरथर्मिया के उपचार में सबसे पहले शरीर के ताप को सामान्य करना ज़रूरी है। कसे हुए कपड़े ढीले कर दें और अतिरिक्त कपड़ो को हटा दें। रोगी पर पानी का हल्का छिड़काव करें, पंखा या कूलर की मदद से ठंडी हवा दें या गीले कपड़ो से लपेटें। कांख, गर्दन और नाभि के नीचे बर्फ के टुकड़े भी रखे जा सकते हैं। अगर यह उपाय शरीर को ठंडा न कर पाए तो बिना देर किये चिकित्सक की सलाह लें। अक्सर चिकित्सक शरीर को अंदर से ठंडा करने के लिए पेट को पानी से फ्लश करते हैं। गंभीर मामलों में कार्डिओ पल्मोनरी बाईपास के ज़रिये शरीर के रक्त को दिल और फेफड़ों में जाने से पहले एक मशीन से गुज़ारकर ठंडा किया जाता है। चिकित्सक आपको मांसपेशियों में तनाव कम करने के लिए दवाई भी दे सकते हैं। बुखार में ली जाने वाली एस्पिरिन या टीलेनोल जैसी दवाईयों को हीट स्ट्रोक में बिलकुल नहीं लिया जाना चाहिए। अक्सर हाइपरथर्मिया होने पर रोगी को हॉस्पिटलाइज किया जाता है ताकि किडनी या मांसपेशियों को हुए नुकसान को जांचा जा सके।

अगर आपको ये पोस्ट पसंद आयी और समझ आया की हाइपरथर्मिया क्या है? हीट स्ट्रोक या अतिताप के लक्षण, हाइपरथर्मिया का कारण, हाइपरथर्मिया के इलाज और परीक्षण, हाइपरथर्मिया की दवाई और उपचार, तो इसे जानकारी के तोर पर अपने दोस्तों से भी शेयर करें. आप हेल्थ प्रैक्टो का फेसबुक पेज भी लाईक करें Health Practo Facebook

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