साइनस (साइनसाइटिस) क्या है? साइनस क्यों होता है? इलाज, लक्षण, परहेज, सर्जरी एवं घरेलू उपाय

साइनस क्या है? साइनसाइटिस क्या है? साइनस क्यों होता है? साइनस का इलाज, साइनस के लक्षण, साइनस का परहेज, साइनस की सर्जरी, घरेलू उपाय, सावधानियां, एंटीबायोटिक्स डॉक्टर की सलाह

Contents

साइनस क्या है? (What is sinus?)

सर्दी लगना और सिर दर्द वैसे तो आम बीमारी, लेकिन ये कई बार किसी गंभीर बीमारी को जन्म दे सकते हेैं। जिनमें से एक है साइनसाइटिस जिसको एक गंभीर बीमारी की श्रेणी में रखा जाता है!

साइनस (Sinus) को ज्यादातर लोग एलर्जी के रूप में देखते हैं क्योंकि इसकी वजह से उन्हें धूल, मिट्ठी, धुंआ इत्यादि की वजह से सांस लेने में परेशानी होती है। लेकिन, यह मात्र एलर्जी नहीं है बल्कि नाक की मुख्य बीमारी है, जो मुख्य रूप से नाक की हड्डी के बढ़ने या तिरछी होने की वजह से होती है।

साइनस पर प्रकाशित रिपोर्ट (Published report on sinus)

ये आंकडे साइनस की स्थिति को बयां करने के लिए काफी हैं, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश लोग इसके लक्षणों की पहचान नहीं कर पाते हैं और इसी कारण वे इससे परेशान रहते हैं।

क्या आप साइनस की पूर्ण जानकारी जानते हैं? नहीं, तो परेशान न हो क्योंकि आप इस लेख के माध्यम से यह जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

क्या होता है साइनस या साइनोसाइटिस? (What is sinus or sinusitis?)

साइनस नाक की समस्या है, जिसे साइनोसाइटिस (Sinusitis) या साइनस की समस्या के नामों से भी जाना जाता है। यह बीमारी उस स्थिति में होती है, जब किसी व्यक्ति की नाक की हड्डी बढ़ जाती है और जिसकी वजह से उसे जुखाम रहता है।

कई बार यह बीमारी समय के साथ ठीक हो जाती है, लेकिन यदि काफी लंबे समय तक रह जाए तो उसके लिए नाक की सर्जरी ही एकमात्र विकल्प बचता है।

साइनसाइटिस कैसे शुरू होता है? (How does sinusitis start?)

साइनसाइटिस आम सर्दी-जुकाम के रूप में शुरू होता है, और फिर एक बैक्टीरियल, वायरल या फंगल संक्रमण के रूप में पूरी तरह से विकसित हो जाता है। साइनस हवा से भरी छोटी-छोटी खोखली गुहा रूपी संरचनाएं हैं जो नाक के आसपास, गाल व माथे की हड्डी के पीछे तथा आँखों के बीच के भाग में पैदा होने लगती है।

जैसे दोनो तरफ के चेहरे की हड्डी में मैक्सिलेरी (maxileri) साइनस, नाक के ऊपर माथे में फ्रंटल (frontal) साइनस, आँखो के पास एथमोइड (ethmoid) साइनस तथा पिछले हिस्से में बीचोंबीच दिमाग़ से सटा स्फेनॉइड (sfenoid) साइनस।

साइनसाइटिस से शरीर में क्या बदलाव आते हैं? (What changes do the sinusitis cause in the body?)

साइनसाइटिस से साइनस में सूजन आ जाती है और यह किसी संक्रमण के कारण होती है। आप सिर दर्द या अपने चेहरे में दर्द और नाक बंद होने का अनुभव कर सकते हैं। कई बार इसमें नाक से हरा पदार्थ बहने लगता है। दर्द इस बात पर निर्भर करता है कि पीड़ित व्यक्ति किस प्रकार के साइनसाइटिस से प्रभावित है।

साइनसाइटिस की मियाद क्या है? (What is the duration of sinusitis?)

यह बीमारी तीन से आठ सप्ताह के मध्य रहने पर तीव्र (acute) व आठ सप्ताह से अधिक रहने पर क्रॉनिक (chronic) साइनसाइटिस कहलाती है। हर साल प्रत्येक दस में तीन व्यक्ति इस बीमारी से पीड़ित हो जाते हैं।

साइनस की आयुर्वेदिक व्याख्या (Ayurvedic interpretation of sinus)

साइनस नाक का एक रोग है। आयुर्वेद में इसे प्रतिश्याय नाम से जाना जाता है। सर्दी के मौसम में नाक बंद होना, सिर में दर्द होना, आधे सिर में बहुत तेज दर्द होना, नाक से पानी गिरना इस रोग के लक्षण हैं।

इसमें रोगी को हल्का बुखार, आंखों में पलकों के ऊपर या दोनों किनारों पर दर्द रहता है। तनाव, निराशा के साथ ही चेहरे पर सूजन आ जाती है। इसके मरीज की नाक और गले में कफ जमता रहता है। इस रोग से ग्रसित व्यक्ति धूल और धुआं बर्दाश्त नहीं कर सकता। साइनस ही आगे चलकर अस्थमा, दमा जैसी गम्भीर बीमारियों में भी बदल सकता है। इससे गम्भीर संक्रमण हो सकता है।

दूषित हवा से बचने के लिए हमारी नाक के दोनों तरफ़ चार जोड़ी अर्थात 8 एयर पॉकेट्स होते हैं, जिन्हें साइनस कहा जाता है. साइनस हमारे नाक में उपस्थित रहकर धूल व अन्य नुक़सानदायक कणों को सांस के ज़रिए फेफड़ों तक पहुंचने से रोकते हैं!

यह नाक में एक तरह के म्यूकस (एक तरह का चिपचिपा पदार्थ) छोड़ते हैं, जो बाहर से आनेवाले हानिकारक कणों को अपने साथ चिपका लेता है. अगर हानिकारक कण बहुत अधिक होता है, म्यूकस भी अधिक निकलता है. ऐसे में साइनस की वजह से ही हमें छींक आती है और म्यूकस के साथ ही हानिकारक कण नाक से बाहर निकल जाते हैं!

साइनस ये सारे जतन हमारे फेफड़ों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए करते हैं पर साइनसाइटिस में इन पर सूजन आ जाती है, जिससे इनका काम और बढ़ जाता है. साइनसाइटिस की समस्या में हानिकारक कण नहीं होने के बावजूद साइनस ज़्यादा मात्रा में म्यूकस छोड़ते हैं और वह छींकों के ज़रिए बाहर निकलता रहता है. यह मुख्यतः एलर्जी के कारण होता है.

साइनोसाइटिस की मेडिकल व्याख्या (Medical interpretation of sinusitis)

साइनोसाइटिस दो शब्द Sinu & sitis से मिलकर बना है। जिसका मतलब है साइनस- गुहा (कोटर) व ढ्ढह्लद्बह्य का सूजन यानी नाक की गुहा में सूजन आना। नाक के आसपास चेहरे की हड्डियों में नम हवा के रिक्त स्थान होते हैं जिन्हें साइनस कहते हैं।

इन साइनस की अंदरुनी सतह (श्लेष्मा झिल्ली) में एलर्जी या किसी अन्य कारण से सूजन आ जाए तो साइनोसाइटिस की समस्या हो जाती है। यह सूजन बैक्टीरिया या वायरस के संक्रमण से पैदा होती है।

साइनस रोग का जन्म (Birth of sinus disease)

साइनस में नाक तो अवरूद्ध होती है, साथ ही नाक में कफ आदि का बहाव अधिक मात्रा में होता है। भारतीय वैज्ञानिक सुश्रुत एवं चरक के अनुसार चिकित्सा न करने से सभी तरह के साइनस रोग आगे जाकर ‘दुष्ट प्रतिश्याय’ में बदल जाते हैं और इससे अन्य रोग भी जन्म ले लेते हैं।

आम धारणा यह है कि इस रोग में नाक के अन्दर की हड्डी बढ़ जाती है या तिरछी हो जाती है जिसके कारण श्वास लेने में रुकावट आती है। ऐसे मरीज को जब भी ठण्डी हवा या धूल, धुआँ उस हड्डी पर टकराता है तो व्यक्ति परेशान हो जाता है।

वास्तव में साइनस के संक्रमण होने पर साइनस की झिल्ली में सूजन आ जाती है। सूजन के कारण हवा की जगह साइनस में मवाद या बलगम आदि भर जाता है, जिससे साइनस बंद हो जाते हैं। इस वजह से माथे पर, गालों पर ऊपर के जबड़े में दर्द होने लगता है।

साइनस या साइनसाइटिस के प्रकार (Types of sinus or sinusitis)

साइनसाइटिस को कई प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है, जिसमें संक्रमण रहने की अवधि (तीव्र, कम तीव्र या लंबे समय से), सूजन (संक्रामक या असंक्रामक) आदि शामिल हैं –

1) तीव्र साइनस संक्रमण (Acute sinus infection) – कम समय तक रहने वाला – आम तौर पर शरीर में इसका संक्रमण 30 दिन से कम समय तक ही रह पाता है।

2) कम तीव्र साइनस संक्रमण (Sub acute sinus infection) – इसका संक्रमण एक महीने से ज्यादा समय तक स्थिर रह सकता है मगर 3 महीने से ज्यादा नहीं हो पाता।

3) क्रॉनिक साइनस संक्रमण (Chronic sinus infection) – लंबे समय तक रहने वाला -यह शरीर में 3 महीने से भी ज्यादा समय तक स्थिर रह सकता है। क्रॉनिक साइनसाइटिस आगे उप-वर्गीकृत भी हो सकता है, जैसे

      • क्रॉनिक साइनसाइटिस नाक में कणों (polyps) के साथ या उनके बिना
      • एलर्जिक फंगल साइनसाइटिस

4) रीकरंट साइनसाइटिस (Recurrent Sinusitis) – बार-बार होने वाला) यह तब होता है जब किसी व्यक्ति पर प्रतिवर्ष कई बार संक्रमण का प्रभाव होता है।

5) संक्रमित साइनसाइटिस (Infected sinusitis) – आम तौर पर सीधे वायरस संक्रमण से होता है। अक्सर बैक्टीरिया की वृद्धि के कारण साइनस संक्रमण या फंगल साइनस संक्रमण भी हो सकता है लेकिन ये बहुत ही कम हो पाता है। कम तीव्र साइनस संक्रमण (Sub acute sinus infection) और क्रॉनिक साइनस संक्रमण (chronic infection) ये दोनों तीव्र साइनस संक्रमण (acute sinus infection) के अधूरे इलाज का परिणाम होते हैं।

6) असंक्रामक साइनसाइटिस (Non-communicative sinusitis) – जलन और एलर्जी के कारण होता है, जो तीव्र, कम तीव्र औऱ क्रॉनिक साइनस संक्रमण को सामान्य साइनस संक्रमण के रूप में अनुसरण करता है।

साइनस कितने कितने प्रकार का होता है? (How many types of sinus are there?)

साइनस मुख्य रूप से 4 प्रकार होता है, जो निम्नलिखित है:

    1. एक्यूट साइनस (Acute sinus) – यह सामान्य साइनस है, जिसे इंफेक्शन साइनस के नाम से भी जाना जाता है।
      एक्यूट साइनस  मुख्य रूप से उस स्थिति में होता है, जो कोई व्यक्ति किसी तरह के वायरस या बैक्टीरिया के संपर्क में आ जाता है।

    2. क्रोनिक साइनस (Chronic sinus) – इस तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जिसमें नाक के छेद्रों के आस-पास की कोशिकाएं सूज जाती हैं।
      क्रोनिक साइनस  होने पर नाक सूज जाता है और इसके साथ में व्यक्ति को दर्द भी होता है।

    3. डेविएटेड साइनस (Deviated sinus)  जब साइनस नाक के एक हिस्से पर होता है, तो उसे डेविएटेड साइनस के नाम से जाना जाता है।
      इसके होने पर नाक बंद हो जाता है और व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होती है।

    4. हे साइनस (Hay sinus)  हे साइनस को एलर्जी साइनस भी कहा जा सकता है।
      यह साइनस मुख्य रूप से उस व्यक्ति को होता है, जिसे धूल के कणों, पालतू जानवरों इत्यादि से एलर्जी होती है।

साइनस के लक्षण क्या होते हैं? (What are the symptoms of sinus?)

हालांकि, ज्यादातर लोग यह कहते हैं कि उन्हें इस बात का पता ही नहीं चला कि उन्हें साइनस कब हो गया। लेकिन, ऐसा कहना सही नहीं है क्योंकि किसी भी अन्य समस्या की भांति इस नाक की बीमारी के भी कुछ लक्षण होते हैं, जो इसके होने का संकेत देते हैं।

अत: यदि किसी व्यक्ति को ये 5 लक्षण नज़र आएं, तो उसे इसकी सूचना डॉक्टर को तुंरत देनी चाहिए-

साइनस में निम्न लक्षण और संकेत दिखते हैं –

    • नाक बहना या पोस्टनेजल ड्रिप (Postnasal Drip) अत्यधिक बलगम बनने के कारण उसके नाक की नाली से गले में बाह जाना)।
    • नाक बंद होना जिसकी वजह से नाक से सांस लेने में परेशानी।
    • आंख, नाक, गाल और माथे के आसपास सूजन और दर्द महसूस होना।
    • गंध और स्वाद की परख करने की क्षमता कम होना।

साइनस के अन्य लक्षण भी हो सकते हैं, जिनमें निम्म लक्षण शामिल हैं –

    • कान दर्द होना
    • ऊपरी जबड़े और दांतों में दर्द महसूस होना
    • रात में खांसी अधिक बढ़ जाना
    • गले में खराश होना
    • मुँह से बदबू आना
    • थकान या चिड़चिड़ापन महसूस होना
    • जी मिचलाना

क्रोनिक साइनसाइटिस और एक्यूट साइनसाइटिस के लक्षण और संकेत सामान होते हैं। परंतु एक्यूट साइनसाइटिस कम समय के लिए होता है और यह जुकाम से जुड़ा होता है।

दूसरी तरफ क्रोनिक साइनसाइटिस के लक्षण और संकेत अधिक समय के लिए होते हैं और इसकी वजह से आप अक्सर अधिक थकान महसूस करते हैं। बुखार क्रोनिक साइनसाइटिस का सानान्य संकेत नहीं है, लेकिन एक्यूट साइनसाइटिस में बुखार हो सकता है।

साइनस और जुखाम में अंतर (Difference between sinus and cold)

साइनस को अक्सर जुकाम के साथ जोड़कर देखा जाता है. जबकि दोनों अलग-अलग हैं. ऐसे में जरूरी है यह समझ लेना कि साइनस क्या होता है. असल में हमारे सिर में कई कैविटीज यानी खोखले छेद होते हैं, जो सांस लेने में मदद करने का काम करते हैं. इन्हीं छेदों को साइसन कहा जाता (What is Sinus) है!

लेकिन जब किसी वजह से इन छेदों में गतिरोध पैदा हो जाए, तो इसे होता है, तब इस स्थिति को साइसन कहा जाता है. साइसन में गतिरोध के कई कारण (Sinus Cause) हो सकते हैं. अब अगर आप सोच रहे हैं कि साइनस के प्रकार (Types of Sinus) कितने होते हैं, तो बता दें कि साइनस दो तरह का होता है. एक्यूट साइनोसाइटिस (Acute Sinus) और क्रॉनिक साइनोसाइटिस (Chronic Sinus). आमतौर पर एक्यूट साइनोसाइटिस 3 से 5 हफ्तों तक रह सकता है वहीं क्रॉनिक साइनोसाइटिस 12 हफ्तों या इससे भी ज्यादा समय तक प्रभावी रह सकता है.

साइनोसाइटिस का नाक पर प्रभाव (Sinusitis effect on nose)

नाक हमारे शरीर का एक अहम सेन्स ऑर्गन होता है. सांस लेने की प्रक्रिया नाक के माध्यम से ही होती है. साइनोसाइटिस नाक को प्रभावित करता है. वास्तव में साइनस हवा की एक थैली होती है जो नाक के चारों ओर फैली होती है!

अंदर ली गई हवा इस थैली से गुजरकर फेफड़ों तक पहुंचती है. यह थैली हवा के प्रदूषित भाग को भीतर जाने से रोकती है और उसे बलगम या विकार के रूप में निकाल देती है. साइनस में जब म्यूक्स का मार्ग अवरूद्ध हो जाता है तब साइनोसाइटिस की स्थिति पैदा होती है!

म्यूक्स में यह अवरोध इंफेक्शन तथा साइनस में सूजन आने के कारण होता है. साइनस अंदर ली गई हवा को नमी प्रदान करता है जिससे श्वास नली तथा फेफड़ों को भी नमी मिलती है, इसके प्रभावित होने से शुष्क वातावरण में सांस लेने में दिक्कत होने लगती है.

साइनस को क्या ट्रिगर करता है? (What triggers the sinus?)

ठंड या एलर्जी से उत्पन्न अवरुद्ध नाक के कारण आप साइनस सिरदर्द महसूस कर सकते हैं। इस प्रकार का सिरदर्द अक्सर सुबह अधिक बार होता है, और यह इस समय के दौरान और अधिक पीड़ादायक लगता है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि तरल पदार्थ पूरे रात साइनस में एकत्र होते हैं, जिससे सुबह दर्द होता है। साइनस सिरदर्द भी तापमान या पर्यावरण में बदलाव के साथ बदतर मोड़ ले सकता है।

साइनसाइटिस के लिए डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए? (When should a doctor see for sinusitis?)

अगर साइनस कंजेशन ऊपर बताये गये उपचारों के उपयोग से 10 दिन में ठीक न हो तो डॉक्टर से परामर्श लें। यह किसी मेडिकल कंडीशन जैसे एलर्जी का लक्षण हो सकता है।

अगर आपके नासा स्राव का रंग या टेक्सचर बदल जाए, अगर आपको हल्का बुखार या सिरदर्द हो तो डॉक्टर को दिखाएं। यह साइनस इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है जिसमें इन्फेक्शन का इलाज करने के लिए एंटीबायोटिक्स लेने की जरूरत होती है।

डॉक्टर से परामर्श लेना अनिवार्य है। सिर दर्द, नाक में भारीपन व अन्य साइनोसाइटिस के लक्षण अगर घरेलू नुस्खों से भी ठीक नहीं होते हैं, तो समझ जाएं कि डॉक्टरी सलाह लेने का समय आ गया है। वैसे भी घरेलू नुस्खे किसी भी समस्या का उपचार नहीं हैं, ये समस्या से बचाव का काम कर सकते हैं।

इसी वजह से बीमारी या कोई समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लेनी जरूरी है। हां, दवाई के साथ डॉक्टरी परामर्श पर भाप, सिकाई, मसाज व लेख में बताए गए अन्य साइनस के घरेलू नुस्खे को अपनाया जा सकता है।

क्रोनिक साइनसाइटिस विकसित होने से पहले आपको कई बार एक्यूट साइनसाइटिस हो सकता है। बार-बार एक्यूट साइनसाइटिस होने के साथ इन स्थितियों में डॉक्टर को जरूर दिखाएं –

    • आपको एक्यूट साइनसाइटिस कई बार हो चुका है और इलाज करने पर भी ठीक नहीं हो रहा है।
    • साइनसाइटिस के लक्षण सात दिन से ज्यादा चल रहे हों।
    • डॉक्टर को दिखाने के बाद भी लक्षणों में सुधार नहीं आता है।

नीचे बताए गए लक्षण अगर आप मससूस करते हैं तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लें। यह लक्षण गंभीर संक्रमण के संकेत हो सकते हैं –

    • तेज बुखार
    • आखों के आसपास त्वचा का लाल पड़ जाना और सूजन
    • सिर में बहुत अधिक दर्द महूसस करना और दवा लेने पर भी ठीक न होना (और पढ़ें – सिरदर्द की दवा)
    • लगातार उलझन महसूस करना
    • एक चीज दो बार दिखाई देना या देखने में अन्य परेशानी
    • गर्दन में अकड़न

साइनसाइटिस विकिपीडिया (Sinusitis Wikipedia)

नाक के आसपास चेहरे की हड्डियों के भीतर नम हवा के रिक्त स्थान हैं, जिन्हें ‘वायुविवर’ या साइनस (sinus) कहते हैं। साइनस पर उसी श्लेष्मा झिल्ली की परत होती है, जैसी कि नाक और मुँह में। जब किसी व्यक्ति को जुकाम तथा एलर्जी हो, तो साइनस ऊतक अधिक श्लेष्म बनाते हैं एवं सूज जाते हैं!

साइनस का निकासी तंत्र अवरुद्ध हो जाता है एवं श्लेष्म इस साइनस में फँस सकता है। बैक्टीरिया, कवक एवं वायरस वहाँ विकसित हो सकते हैं तथा वायुविवरशोथ या साइनसाइटिस (Sinusitis) का कारण हो सकते हैं।

साइनस के कारण – साइनस क्यों होता है? (Causes of sinus – Why does sinus occur?)

यह सवाल हर उस शख्स के लिए मायने रखता है, जो इस नाक की बीमारी से पीड़ित होता है।
वह हमेशा इस बात को जानने को उत्सुक रहता है कि आखिरकार उसे यह बीमारी किस वजह से हुई, ताकि वह इसका सही इलाज करा सके।

जिस तरह की लाइफ़स्टाइल के हम आदि होते जा रहे हैं, वही इस परेशानी के मूल कारणों में शामिल है. प्रदूषण, एसी-कूलर का प्रयोग, ठंडे पानी व कोल्ड ड्रिंक्स का लगातार सेवन, इम्यूनिटी की कमी, वायरल या फ़ंगल या बैक्टीरियल इंफ़ेक्शन, रीढ़ का कर्व ख़राब होना है!

यह समस्या ऐंटीबायोटिक दवाओं के ज़्यादा प्रयोग से भी हो सकती है, क्योंकि ऐंटीबायोटिक दवाएं शरीर में मौज़ूद गुड बैक्टीरिया को नष्ट करके फ़ंगस की ग्रोथ को बढ़ाती हैं.

साइनसाइटिस कई कारणों की वजह से होता है। लेकिन इसका मुख्य कारण है साइनस या नाक में तरल पदार्थ का इकठ्ठा हो जाना, जिसमें रोगाणु पैदा हो जाते हैं।

    • वायरस – वयस्कों में अधिकतर साइनसिसिटिस संक्रमण किसी वायरस की वजह से ही होता है।
    • बैक्टीरिया
    • प्रदूषण – रसायन और प्रदूषण की वजह से बलगम बढ़ता है।
    • कवक (फंगस) – या तो हवा में कवक से साइनस में एलर्जी होती है या ये फंगस साइनस में घुस कर साइनसाइटिस की वजह बन जाता है।
    • कुछ अन्य चिकित्सीय स्थिति – सिस्टिक फाइब्रोसिस, गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (गर्ड, जिसका कम गंभीर रूप होती है एसिडिटी), एचआईवी और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने की वजह से आपकी नाक बंद हो जाती है।
    • फैमली हिस्ट्री का होना- किसी भी अन्य समस्या की तरह साइनस भी फैमली हिस्ट्री की वजह से हो सकती है। अन्य शब्दों में, यदि किसी शख्स के परिवार में किसी अन्य व्यक्ति साइनस है, तो उसे यह नाक की बीमारी होने की संभावना अधिक रहती है।
    • नाक की असामान्य संरचना का होना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि नाक की यह समस्या उस स्थिति में हो सकती है, जब किसी व्यक्ति की नाक की संरचना असामान्य होती है।
      अत: जब कोई व्यक्ति इस समस्या को लेकर किसी डॉक्टर के पास जाता है, तो उस स्थिति में डॉक्टर उसके नाक का एक्स-रे करते हैं ताकि उसकी नाक की संरचना का पता लगाया जा सके।
    • रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना- यदि किसी व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) है, तो उसे साइनस की समस्या हो सकती है।

साइनस का प्रबंधन (Sinus management)

साइनसाइटिस आम बात है तथा इसका आसानी से इलाज किया जा सकता है। जब बच्चे को सर्दी हो तथा लक्षण 10 दिनों के बाद भी मौजूद हो या यदि बच्चे को 7 दिनों तक सर्दी के लक्षण के बाद बुखार हो, तो बच्चे को उपचार के लिए चिकित्सक के पास ले जाएं।

अपने वातावरण को साफ रखें तथा जिनसे आपको साइनसाइटिस होता हो, उन परिस्थितियों या एलर्जी के कारकों से बचने की कोशिश करें।

साइनस होने का जोखिम किन वजह से बढ़ता है? (What increases the risk of having sinus?)

निम्न लोगों में साइनसाइटिस होने का खतरा अधिक होता है –

    • जिन लोगों के श्वसन नली में पहले कभी संक्रमण हो चुका है जैसे जुकाम आदि।
    • जिनकी नाक में रोगाणुओं पैदा हो गए हों, जिससे नाक की नली में सूजन आ जाती है।
    • जिनकी किसी बीमारी की वजह से या किसी बीमरी की इलाज की वजह से रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो गयी हो।
    • जिनको अस्थमा हो, क्योंकि इसके और क्रोनिक साइनसाइटिस होने के बीच में सम्बन्ध होता है।
    • जिनको धूल, पराग और जानवरों के बाल आदि से एलर्जी हो।
    • जिनकी नाक की अंदरूनी वनावट ठीक न हो। सेप्टम एक प्रकार की हड्डी है, जो आपके नाक में उपस्थित होती है। यह हड्डी नाक को दो भागों में विभाजित करती है। अगर किसी चोट की वजह से या प्राकृतिक रूप से सेप्टम एक तरफ ज्यादा झुक जाती है, तो साइनसाइटिस या अन्य संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है।
    • जो लोग धूम्रपान करते हैं।
    • दांत में संक्रमण होने से साइनस संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

साइनस से बचाव – साइनस की रोकथाम कैसे करें? (Sinus Prevention – How to Prevent Sinus?)

इस नाक की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति यह जानना चाहता है कि वह किस तरह से साइनस संक्रमण की रोकथाम कर सकता है। यदि उसे यह जानकारी मिल जाए तो वह इसके कई सारे जोखिमों को कम कर सकता है और इसके साथ में वह इसकी सहायता से जल्दी ठीक हो सकता है।

साइनसाइटिस से बाचव के कुछ उपाय इस तरह हैं –

    • हाथों को अच्छी तरह से धोएं और स्वच्छता बनाये रखें। (और देखें – स्वच्छता से संबंधित गलत आदतें)
    • धूल और फफूंद जैसे प्रदूषण से बचें और अधिक से अधिक स्वच्छ वतावरण में रहने की कोशिश करें।
    • ऊपरी श्वसन प्रणाली के संक्रमण से बचें। इसके अलावा जो लोग सर्दी-जुकाम से ग्रस्त हो उन्हें न छुएं या उनके संपर्क में न आएं। बार-बार अपने हाथ साबुन से धोएं खासकर भोजन करने से पहले।
    1. ध्रूमपान न करना आप यह जानते होंगे कि ध्रूमपान के सेवन को सही नहीं माना जाता है क्योंकि इससे कई सारी बीमारियां हो सकती हैं। अत: किसी भी व्यक्ति को ध्रूमपान नहीं करना चाहिए ताकि वह सेहतमंद ज़िदगी बीता सके। धूम्रपान और प्रदूषित हवा से बचें। तम्बाकू का धुआं और प्रदूषित वायु आपके फेफड़े और नाक में सूजन पैदा करती है।
    2. छींकते या खांसते समय टिशू पेपर या रूमाल का उपयोग करना जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि साइनस की समस्या वाइरस या बैक्टीरियां के कारण भी होती है। इसी कारण सभी लोगों को इस बात का ख्याल रखना चाहिए वे छींकते या खांसते समय किसी टिशू पेपर या रूमाल का इस्तेमाल करें ताकि किसी दूसरे व्यक्ति को किसी तरह के वायरस या बैक्टीरिया न फैलें।
    3. नाक को साफ रखना चूंकि, साइनस नाक की बीमारी है, इसी कारण सभी लोगों को अपने नाक का विशेष ध्यान रखना चाहिए और उसे नाक को साफ रखना चाहिए। अगर आपको कोई ज्ञात एलर्जी है तो उससे बचने की लोशिश करें।
    4. स्ट्रॉ का इस्तेमाल न करना– यदि कोई व्यक्ति कॉल ड्रींग या जूस पिता है, तो उसे स्ट्रॉ का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि उसका असर उसके नाक या मस्तिष्क पर न पड़े।यह कार्य साइनस की संभावना को काफी कम कर सकता है।
    5. डॉक्टर के संपर्क में रहना अंत में जिस बात का सभी लोगों को ध्यान रखना चाहिए वह यह है कि यदि उसे नाक संबंधी किसी तरह की परेशानी हो तो वह तुंरत डॉक्टर से मिले और उसका इलाज कराए।
      इसके साथ में यदि कोई व्यक्ति साइनस का इलाज करा रहा है तो उसे तब तक डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए जब तक वह उसे पूरी तरह से स्वस्थ घोषित न कर दे।

साइनस का घरेलू इलाज (Sinus Home Remedies)

साइनस के कारण लगातार दर्द होता है और छींक आती रहती है। इससे इंसान कमजोर हो जाता है। बिना दवा के ठीक होने के लिए सबसे जरूरी है आराम और अच्छी नींद। इसके बाद ही कोई घरेलू इलाज कारगर साबित होगा।

साइनस की स्थिति में पानी या तरल पदार्थों का सेवन खूब करना चाहिए। इससे शरीर हाइड्रेटेड रहेगा यानी पानी की कमी नहीं होगी। गुनगुना पानी पिएं। अदरक वाली चाय या कॉफी का सेवन भी कर सकते हैं। फलों का जूस पीने के बजाए गरम तासीर वाले फल खाएं। जहां तक संभव हो बहुत ज्यादा मीठे पदार्थों से दूर रहें।

साइनस में भाप लेना जरूरी होता है। गर्म पानी के बड़े बर्तन में सिर डाले और गर्म भाप लें। नाक के अंदर तक आराम मिलेगा। एक और तरीका यह है कि पानी में नमक और बेकिंग पावडर मिलाएं और सूंघें या स्प्रे बोतल से इसे थोड़ा-थोड़ा नाक में स्प्रे भी किया जा सकता है।

अदरक में कफ को खत्म करने के गुण होते हैं। साइनस में शहद के साथ अदरक का उपयोग फायदेमंद है। तुलसी कई बीमारियों का इलाज है। रोज सुबह तुलसी की चार-पांच पत्तियां खाने या तुलसी का काढ़ा बनाकर सेवन करने से कफ निकलता है और साइनस जल्दी ठीक होता है। इसी तरह किसी ने किसी रूप में सोंठ, काली मिर्च, दालचीनी, जीरा और गुड़ का सेवन करें। लहसून भी शरीर में गर्मी प्रदान करती है। लहसून की दो-तीन कली को भूनकर चबाएं। खाने में परवल और मूली का ज्यादा से उपयोग करें।

साइनस या साइनसाइटिस का आयुर्वेदिक इलाज (Ayurvedic treatment of sinus or sinusitis)

आयुर्वेद इसका अच्छा व स्थाई रूप से समाधान प्रदान कर सकता है. इसके लिए आप निम्न उपाय कर सकते हैं.

    • नियमित प्राणायाम करें.
    • नाक में सुबह व शाम गाय के शुद्ध घी की कुछ बूंदें डालें.
    • रीढ़ की हड्डी पर किसी पोषक तेल की मालिश करें.
    • एक कप गुनगुने पानी में एक चुटकी नमक डालकर पानी को चुल्लू से नाक में लगभग एक से दो इंच तक अंदर खींचें, फिर निकाल दें. इससे तुरंत राहत मिलती है. यह इन्फ़ेक़्शन को कम करता है और साइनस के ब्लॉकेज को हटाता है!
    • रात में सोते समय आग में भुने हुए अनार के रस में अदरक का रस मिलाकर पिएं. अनार को माइक्रोवेव में भून सकते हैं.

साइनस या साइनसाइटिस से बचने के लिए सावधानियां (Precautions to avoid sinus or sinusitis)

साइनसाइटिस से परेशान व्यक्ति को कई सावधानियां बरतनी चाहिए.

    • ठंडा पानी एवं कोल्ड ड्रिंक्स ना पिएं.
    • दही, अचार एवं खटाई ना खाएं. विटामिन सी के लिए आंवला ले सकते हैं, क्योंकि विटामिन सी इसके उपचार में बहुत उपयोगी है.
    • फलों को खाकर पानी न पिएं, क्योंकि इससे शरीर मे कफ़ बढ़ता है और वह साइनसाइटिस  और अस्थमा जैसी समस्या उत्पन्न करता है.
    • प्रदूषण से बचें. धूल और धुएं वाली जगह पर जाएं तो रूमाल से मुंह ढंककर जाएं.
    • एसी-कूलर का अधिक प्रयोग करने से बचें.
    • गर्म जगह से आकर एकदम ठंडी जगह पर ना जाएं, यानी एसी में जाने से बचें.
    • ठंडे पानी से स्नान ना करें और नहाकर पंखे की हवा में न आएं.
    • सुबह उठकर ख़ाली पेट पानी न पिएं, क्योंकि यह भी कफ़ बढ़ाता है.
    • अपने पॉस्चर को ठीक रखें, रीढ़ को झुकाकर न बैठें.
    • गर्म पानी में नमक मिलाकर नहाएं और नहाते समय पोर्स यानी रोम छिद्रों को खोलने के लिए शरीर को अच्छे से रगड़ें. ऐसा करने से शरीर से टॉक्सिन्स निकलते हैं और शरीर के सभी अंग स्वस्थ रहते हैं.

साइनस या साइनसाइटिस का परिक्षण कैसे किया जाता है? (How is a sinus or sinusitis tested?)

साइनस संक्रमण का परिक्षण

साइनस संक्रमण का निदान अक्सर पिछली चिकित्सा की जानकारी और डॉक्टर द्वारा किए गए परिक्षण के आधार पर किया जाता है।

साइनस का खाली एक्स-रे अध्ययन भ्रामक हो सकता है। सीटी स्कैन और एमआरआई स्कैन साइनस संक्रमण का निदान करने की क्षमता में बहुत संवेदनशील मशीनें होती हैं, लेकिन ये मशीनें बहुत महंगी होती हैं और ज्यादातर अस्पतालों में उपलब्ध नहीं होती। इसीलिए आम तौर पर साइनस संक्रमण का शुरुआती निदान और इलाज मेडिकल निष्कर्षों के आधार पर किया जाता है। इसमें ये निष्कर्ष शामिल हो सकते हैं

    • नाक के मार्ग में सूजन आना और लाल हो जाना
    • नाक से बलगम या पस (pus) निकलना (लक्षणों के रूप से साइनस संक्रमण के निदान के लिए यह सबसे संभावित लक्षण हो सकता है)
    • गाल या माथे की त्वचा को छूने पर त्वचा में दर्द महसूस होना।
    • आंखों के पास और गालों पर सूजन

कभी-कभी, गुप्त कोशिकाओं के लिए नाक के स्त्राव की जांच की जाती है जो संक्रामक और एलर्जिक साइनसाइटिस के बीच अंतर बताने में मदद करती है।

साइनस संक्रमण शुरुआती उपचार से ठीक न होने पर क्या करें? (What to do if a sinus infection is not cured with initial treatment?)

अगर साइनस संक्रमण शुरुआती उपचार से ठीक नहीं होता, तो सीटी स्कैन और एमआरआई स्कैन की मदद से गहन अध्ययन किए जा सकते हैं। गर्भवती महिलाओं में साइनस के संक्रमण का निदान करने के लिए अल्ट्रासाउंड का प्रयोग किया जाता है, पर यह सी.टी. स्कैन, एमआरआई और राइनोस्कॉपी या एंडोस्कॉपी की तरह सटीक लक्षण नहीं दिखा पाता।

इसके अलावा, एंडोस्कॉपी का प्रयोग साइनस के नैदानिक सामग्री प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह प्रतिक्रिया सामान्य बेहोशी की दवा की मदद से ऑटोलेरिंगोलोजिस्ट (otolaryngologist) द्वारा की जाती है। कभी-कभी मरीज को शामक (बेहोशी की दवा) देने की जरूरत भी पड़ सकती है। कुछ जांचकर्ताओं के अनुसार, सुई द्वारा छेद करके प्राप्त किए गए नमूनों से एंडोस्कॉपी के नमूने तुलनीय हैं।

कवक संक्रमण (फंगल इन्फेक्शन) का निदान आम तौर से बायोप्सी प्रतिक्रिया (biopsy procedures) द्वारा किया जाता है। एलर्जिकल फंगल साइनसाइटिस, साइनस कैविटी के फंगल तत्वों में सूजन पैदा करता है, इसका निदान सीटी स्कैन और इमेंजिंग टेस्ट के आधार पर या फिर शारीरिक परिक्षण के आधार पर किया जाता है।

साइनस या साइनसाइटिस का इलाज क्या है? (What is the treatment for sinus or sinusitis?)

संभवत: ज्यादातर लोग ऐसा सोचते हो कि यदि एक बार उन्हें यह नाक की बीमारी हो जाए तो फिर वे इससे निजात पा सकते हैं। लेकिन उनका ऐसा सोचना पूरी तरह से गलत है क्योंकि किसी भी अन्य बीमारी की तरह साइनस का भी इलाज संभव है। यदि कोई व्यक्ति इस नाक की बीमारी से पीड़ित है तो वह इन तरीकों से इससे निजात पा सकता है-

साइनसाइटिस का उपचार दवाओं और कई घरेलू नुस्खों की मदद से किया जा सकता है, जैसे चेहरे पर गर्म पानी की भाप लेना। इसके अलावा साइनसाइटिस के उपचार के कुछ निम्न लक्ष्य हैं:

    • बलगम को निकालनें की कोशिश करना
    • साइनस की सूजन कम करना
    • दर्द और दबाव को कम करना
    • किसी प्रकार के संक्रमण का तुरंत इलाज करवा लेना
    • किसी ऊतक या निशान को बनने से रोकथाम, और नाक तथा साइनस की परत को अन्य क्षति होने से बचाएं

क्रॉनिक या तीव्र साइनसाइटिस का इलाज करवाने से पहले एंटीबायोटिक्स या घरेलू नुस्खों की मदद से मरीज थोड़ा स्वस्थ महसूस कर सकता है। मगर कई बार इसके कारण लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं, और उसके लिए अतिरिक्त उपचार की भी जरूरत पड़ सकती है।

साइनस के 5 उपचार (5 treatments for sinus)

1. अगर आपको साइनस की वजह से सिरदर्द और सांस लेने में परेशानी महसूस कर रहे हैं, तो ऐसे में प्याज को धोकर कद्दूकस करके उसका रस निकालकर पानी में मिलाकर उबाल लें। फिर प्याज वाले पानी से कुछ देर भाप लेकर सो जाएं। इससे कुछ देर में आपकी बंद नाक खुल जाएगी।

2. साइनस के उपचार में तेल का उपयोग करना बेहद फायदेमंद होता है। आमतौर पर साइनस को ठीक करने के लिए पुदीने, नींबू और लौंग के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। नियमित रूप से इन तेलों को गर्म करके सीने, नाक और सिर पर मसाज करने से राहत मिलती है। इन खास तेलों को घर में भी आसानी से बनाया जा सकता है। इसके लिए नारियल या जैतून के तेल में पुदीना पत्ती या नींबू के छिलकों डालकर गर्म करें या धूप में लगातार 1 सप्ताह रखें।

3. साइनस को दूर करने के लिए गर्मागर्म चाय पीना भी बेहद असरदार उपाय है। इसके लिए अदरक, तुलसी, लौंग और इलायची वाली चाय पीने से न सिर्फ बंद नाक खुलती है बल्कि सर्दी जुकाम और सिरदर्द में भी राहत मिलती है।

4.साइनस की समस्या से छुटकारा पाने के लिए टमाटर भी कारगर होता है। टमाटर, लहसुन,नमक एक मिक्सर में डालकर पेस्ट बना लें, फिर पानी डालकर एक उबाल आने तक पका लें फिर काली मिर्च पाउडर मिलाकर गर्मागर्म सूप का सेवन करें।

5.अगर आप साइनस की कड़वी दवाईयों और नोजल का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं, तो ऐसे में रोजाना लहसुन की 1-2 कलियों का सेवन करें या गर्मागर्म सूप बनाकर पीएं। लहसुन में एंटी फंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। जिससे इंफेक्शन को आसानी से दूर किया जा सकता है।

साइनस के इलाज का खर्चा कितना है? (How much does sinus treatment cost?)

जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि जब साइनस के इलाज के लिए सर्वोत्तम तरीका नाक की सर्जरी या साइनस सर्जरी है। जब कोई डॉक्टर किसी व्यक्ति को सर्जरी कराने की सलाह देते हैं, तो उस स्थिति में उसके मन में सबसे पहला सवाल यह आता है कि साइनस सर्जरी की कीमत क्या है।

उसके लिए यह सवाल इसलिए मायने रखता है क्योंकि इसका असर उसकी आर्थिक स्थिरत पर पड़ता है। हो सकता है कि साइनस से पीड़ित अधिकांश लोगों को साइनस सर्जरी महंगी प्रक्रिया लगे और इसी कारण वे इसका लाभ न उठा पाएं। लेकिन, यदि उन्हें यह पता हो कि वे इसे मात्र 3 लाख से 7 लाख होती है तो शायद वे बेहतर ज़िदगी जी पातें।

साइनसाइटिस में एंटीबायोटिक्स का सेवन (Intake of antibiotics in sinusitis)

तीव्र साइनसाइटिस (Acute sinusitis) – आम तौर पर चार हफ्तों से ज्यादा दिन तक नहीं हो पाता। साइनसाइटिस से ग्रसित हर दूसरा या तीसरा व्यक्ति बिना एंटीबायोटिक्स की मदद से खुद में काफी सुधार ला सकता है। साइनस संक्रमण खास तौर पर वायरल संक्रमण के कारण होता है जिस पर एंटीबायोटिक्स असर नहीं कर पाती।

इस बारे में डॉक्टर की सलाह तीव्र साइनस संक्रमण के लिए सही उपचार और एंटीबायोटिक्स निर्धारित करने में मदद कर सकती है। तीव्र साइनस संक्रमण अगर बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होता है, तो ज्यादातर लोग एंटीबायोटिक्स की मदद से खुद को जल्दी ठीक कर लेते हैं। ठीक होने के लिए लगने वाला समय एंटीबायोटिक्स और संक्रमण की गंभीरता पर निर्भर करता है।

जब मरीज को एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह ही जाती है तो मरीज को पूरी तरह ठीक होने तक एंटीबायोटिक्स लेनी चाहिए, यहां तक कि अगर मरीज को स्वस्थ महसूस हो तो डॉक्टर से बात करके उनके निर्देशों का पालन करना चाहिए। क्योंकि हो सकता है संक्रमण पूरी तरह से शरीर से खत्म ना हुआ हो।

क्रॉनिक साइनसाइटिस  (Chronic sinusitis) – इसके लिए 12 हफ्ते या उससे भी ज्यादा समय तक रहने वाले साइनसाइटिस के संक्रमण को क्रॉनिक साइनसाइटिस कहते हैं। इसका उपचार काफी कठिन होता है और एंटिबायोटिक्स भी इस पर धीरे-धीरे असर करती हैं।

एंटीबायोटिक थेरेपी (Antibiotic therapy) – आम तौर पर क्रॉनिक साइनसाइटिस के लिए प्रयोग की जाती है क्योंकि इसमें उपचार के लंबे कोर्स की जरूरत पड़ती है। इसमें मरीज को एक से ज्यादा एंटीबायोटिक्स लेने की जरूरत पड़ सकती है। इलाज के दौरान कोर्टिकोस्टेरॉइड नेजल स्प्रे की मदद से नाक के वायुमार्ग की परत से सूजन को कम किया जा सकता है।

कुछ लोगों में साइनस संक्रमण फंगस या बैक्टिरियम के कारण होता है उन लोगों की तुलना में जो सामान्य रूप से संक्रमण से ग्रस्त हुए हैं। जिन लोगों की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली ठीक से काम नहीं कर पा रही है, उनके लिए इन असाधारण संक्रमणों के जोखिम बढ़ सकते हैं।

संक्रमण का खतरा उन लोगों के लिए भी बहुत है, जो ओरल और इनहेल्ड कोर्टिकोस्टेरॉयड (जैसे प्रेडनीसॉन) दवाओं का प्रयोग करते हैं। फंगल साइनसाइटिस, जो बहुत से क्रॉनिक साइनसाइटिस मामलों के लिए जिम्मेदार होता है। यह एंटीबायोटिक्स दवाओं पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता और इसके उपचार के लिए एंटीफंगल दवाएं, कोर्टिकोस्टेरॉयड या सर्जरी का प्रयोग किया जाता है।

अगर मरीज सीमित अवधि से ज्यादा समय तक एंटीबायोटिक ले चुका है, और लक्षण अभी भी दिख रहे हैं या कुछ जटिलताएं (जैसे चेहरे की हड्डीयों में संक्रमण) होने की संभावना हो सकती है। ऐसे में सर्जरी की आवश्यकता भी पड़ सकती है।

साइनस के दौरान बरतें ये सावधानियां (Take these precautions during sinus)

साइनस के दौरान कुछ बातों का ख्याल रखना जरूरी होती है। जहां तक संभव हो, गुनगुने पानी का सेवन करें। ठंडे पानी से न नहाएं। धूम्रपान और शराब पूरी तरह से छोड़ दें। खाने-पीने का समय तय रखें। सही समय पर सोएं और पर्याप्त नींद लें। देर रात तक न जागें।

सर्दी के दिनों में धूप में बैठने से फायदा होता है। जिन लोगों की रोगों से लड़ने की क्षमता कम है वे बेमौसम घर से बाहर न निकलें।

साइनस के लिए योगासन (Yogasana for sinus)

साइनस का घरेलू उपचार योगासन भी हो सकता है। दरअसल, योग के दौरान सांस लेने व छोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिस वजह से श्वसन तंत्र को मजबूती मिलती है। इसी वजह से साइनस संक्रमण के लिए योगासन को बेहतर माना जाता है।

गोमुखासन, भुजंगासन, अधोमुख श्वानासन जैसे कई योगासन को साइनोसाइटिस के यौगिक उपचार में गिना जाता है। साइनस ठीक रखने में अनुलोम विलोम प्राणायम बहुत फायदेमंद है। इसके अलावा उत्तानासन, कपालभाती और कर्नापीड़ासन साइनस के लिए रामबाण हैं।

साइनस का इलाज नहीं होने पर क्या जोखिम हो सकते हैं? (What are the risks when sinus is left untreated?)

ऐसा माना जाता है कि किसी भी बीमारी को नज़रअदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करना किसी भी व्यक्ति के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

यह बात साइनस के संदर्भ में भी सटीक प्रतीत होती है, क्योेंकि यदि साइनस संक्रमण का इलाज सही समय पर न किया जाए, तो यह कई सारे जोखिमों का कारण बन सकता है।

साइनस के लाइलाज रहने पर निम्नलिखित जोखिम हो सकते हैं:

    • साइनस का मस्तिष्क में फैलना इस नाक की बीमारी के लाइलाज रहने पर यह शरीर के अन्य अंग (विशेषकर मस्तिष्क) में फैल सकता है। हालांकि, ऐसी स्थिति में ब्रेन सर्जरी को कराना ही एकमात्र विकल्प बचता है।

    • आंखों में संक्रमण का होना साइनस का इलाज समय पर न होने के कारण आंख में संक्रमण हो सकता है। ऐसी स्थिति में आंख के डॉक्टर की आवश्यकता पड़ती है।

    • मस्तिष्क का खराब होना– यदि इस नाक की समस्या से पीड़ित व्यक्ति इसका इलाज समय रहते नहीं कराता है, तो यह मस्तिष्क के खराब या ब्रेन फेलियर का कारण बन सकता है।
      अत: किसी भी व्यक्ति को इसे नज़रअदाज़ नहीं करना चाहिए और इसका इलाज सही समय पर कराना चाहिए।

    • अस्थमा की बीमारी का होना कई बार ऐसा भी देखा गया है कि यदि साइनस लंबे समय तक लाइलाज रह जाता है तो वह यह अस्थमा होने का कारण बन सकता है।
      इस स्थिति में व्यक्ति को अतिरिक्त इलाज की जरूरत पड़ सकती है।

    • मौत होना कुछ लोगों की इस नाक की बीमारी की वजह से मौत हो जाती है।
      लेकिन यह राहत की बात है कि ऐसे लोगों की संख्या काफी कम है, फिर भी व्यक्ति को इस दौरान किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

साइनस के लिए जरूरी सलाह (Important advice for sinus)

जैसा कि हम सभी यह जानते हैं कि आज कल बहुत सारी समस्याएं फैल रही हैं। जिसे लेकर ज्यादा गंभीर नहीं होते हैं।

यदि साइनस (sinus) की बात की जाए तो अलग-अलग लोग इसे अलग-अलग रूप में देखते हैं। उदाहरण के लिए कुछ लोग इसे सिरदर्द समझ लेते हैं तो वहीं कुछ लोग इसे गले में इंफेक्शन मानते हैं।

उनके इसी दृष्टिकोण के कारणवश वे इसका सही इलाज नहीं करा पाते हैं।
अत: समझदारी यही है कि लोगों को साइनस की सही जानकारी दी जाए, ताकि वे इससे निजात पा सकें।

इस प्रकार हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को पढ़ना उपयोगी साबित हुआ होगा क्योंकि हमने इसमें साइनस की समस्या (sinus Problem) की पूर्ण जानकारी देने की कोशिश की है।

यदि आप या आपकी जान-पहचान में कोई व्यक्ति नाक संबंधी किसी समस्या और उसके उपचार के संभावित तरीकों की अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहता है तो वह इसके लिए Health Practo पर मुफ्त सलाह प्राप्त कर सकता है।

साइनस पर निबंध (Essay on sinus)

आजकल की अनियमित जीवन शैली में लोग अपनी सेहत का सही प्रकार से ख्याल नहीं रख पाते, जिसके कारण उन्हें अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

आज हम आप को साइनस के लक्षण और उपचार के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे अधिकतर लोग परेशान रहते हैं। यह बीमारी आम सर्दी के रूप में शुरू होती है और फिर एक बैक्टीरियल, वायरल या फंगल संक्रमण के साथ बढ़ जाती है।

साइनस नाक में होने वाला एक रोग है। इस रोग में नाक की हड्डी भी बढ़ जाती है या तिरछी हो जाती है, जिसकी वजह से सांस लेने में परेशानी होती है। जो व्यक्ति इस रोग से ग्रसित होता है उसे ठंडी हवा, धूल, धुआं आदि में परेशानी महसूस होती है।

साइनस दरअसल मानव शरीर की खोपड़ी में हवा भरी हुई कैविटी होती है, जो हमारे सिर को हल्कापन व श्वास वाली हवा लाने में मद्द करती है। श्वास लेने में अंदर आने वाली हवा इस थैली से होकर फेफड़ों तक जाती है। यह थैली, हवा के साथ आई गंदगी यानि धूल और दूसरी तरह की गंदगियों को रोकती है।

जब व्यक्ति के साइनस का मार्ग रूक जाता है, तो बलगम निकलने का मार्ग भी रूक जाता है, जिससे साइनोसाइटिस नामक बीमारी होती है। साइनस का संक्रमण होने पर इसकी झिल्ली में सूजन आ जाती है, जिसके कारण झिल्ली में जो हवा भरी होती है उसमें मवाद या बलगम आदि भर जाता है और साइनस बंद हो जाते हैं। ऐसा होने पर मरीज को परेशानी होनी लगती है।

इस बीमारी का मुख्य कारण झिल्ली में सूजन का आना है। यह सूजन निम्न कारणों से आ सकती है – 
    • बैक्टीरिया
    • फंगल संक्रमण
    • नाक की हड्डी का ढ़ेडा होना।

इस बीमारी के खास लक्षण जिनके आधार पर आप इस बीमारी को आसानी से पहचान सकते हैं।

    • सिर का दर्द होना
    • बुखार रहना
    • नाक से कफ निकलना और बहना
    • खांसी या कफ जमना
    • दांत में दर्द रहना
    • नाक से सफेद हरा या फिर पीला कफ निकलना
    • चेहरे पर सूजन का आ जाना
    •  कोई गंध न आना
    • साइनसाइटिस बदलती उम्र के लोगों में विभिन्न लक्षण पैदा कर सकता है।
    • बच्चों को आमतौर से जुकाम जैसे लक्षण होते हैं जिसमें भरी हुई या बहती नाक तथा मामूली बुखार सहित लक्षण शामिल हैं। जब बच्चे को सर्दी के लक्षणों की शुरुआत के करीब तीसरे या चौथे दिन के बाद बुखार होता है, तो यह साइनसाइटिस या कुछ अन्य प्रकार के संक्रमण जैसे ब्रोंकाइटिस, न्यूमोनिया, या एक कान के संक्रमण का संकेत हो सकता हैं।
    • वयस्कों में साइनसाइटिस के अधिकतर लक्षण दिन के समय सूखी खाँसी होना जो सर्दी के लक्षणों, बुखार, खराब पेट, दांत दर्द, कान में दर्द, या चेहरे के ढीलेपन के पहले 7 दिनों के बाद भी कम नहीं होते। अन्य देखें गये लक्षण है पेट की गड़बड़ी, मतली, सिर दर्द एवं आंखों के पीछे दर्द होना।
    • साइनस की जगह दबाने पर दर्द का होना आदि इसके लक्षण हैं।

जांच – वैसे तो साइनस की समस्या कोई गंभीर बीमारी नहीं है, लेकिन समय रहते इसका इलाज नही कराया गया तो मरीज को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

मरीज को यह बीमारी है या नहीं, यह जानने के लिए सि‍टी स्कैन या एमआरआई के अलावा साइनस के अन्य कारणों को लेकर खून की जांच भी की जाती है, जिससे हमें बीमारी होने का ठोस कारण पता चल सके।

इलाज – अगर सिटी स्कैन व एलर्जी टेस्ट आदि करवाकर यदि नाक की हड्डी एवं साइनस की बीमारी सामने आती है, तो उस मरीज को घबराने की जरूरत नहीं है। आज कल इसका ऑपरेशन दूरबीन विधि से या फिर नाक की इंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी करा सकते हैं।

साइनस से ग्रसित व्यक्तियों को धुंए और धूल से बचना चाहिए। साथ ही साथ आप उबलते हुए पानी की भाप या सिकाई भी कर सकते हैं, इस दौरान पंखा और कूलर भी बंद कर लें। अगर समय रहते इसका इलाज नहीं कराया गया तो बाद में अस्थमा और दमा जैसे कई गंभीर रोग भी हो सकते है।

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हमें उम्मीद है कि इस लेख में प्रस्तुत इस विषय पर सभी जानकारी आपके लिए वास्तव में उपयोगी होगी। स्वस्थ रहो!

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